मौजूदा हालात देखें तो सब तरफ लॉकडाउन है, आमदनी हो नही रही है। किसी को वेतन मिल भी रहा है तो उतना ही जिससे बस घर का राशन पानी चल सके। अब मसला यह कि क्या जरूरी है कि जो बच्चें अभी पहली दूसरी में है। जिन्हें शायद अभी तक अपने कपड़े भी खुद से पहनना नही आता है वो ऑनलाइन क्लासेज अटेंड करें?
कई या यूं कहूँ कि लगभग सभी स्कूल आजकल बच्चों को ऑनलाइन क्लासेज करवा रहे हैं, क्योंकि यह ज्ञात है कि शायद आने वाले कई माह तक स्कूल खुल नही पाएंगे। सरकारी दिशा निर्देश के अनुरूप ही स्कूल अपना कार्यान्वयन करेंगे। तो अब चिंता यही है कि क्या किया जाए? समय निकल रहा है, कोर्स कैसे कराएंगे तो चलो बच्चों की ऑनलाइन क्लासेज शुरू करते है।
खासकर एनसीआर दिल्ली में सभी पेरेंट्स को फ़ोन किया जा रहा है, मैसेज किये जा रहे हैं बच्चो को ऑनलाइन क्लासेज अटेंड करवायें। अब बेचारे माता- पिता परेशान हैं, ओर भला परेशान हो भी क्यों न हो। एक अनुमान के मुताबिक 70% बच्चों के माता-पिता अपनी सारी सुख सुविधा छोड़कर बच्चों को अंग्रेजी स्कूल में पढ़ाते है और उनके लिए ट्यूशन लगवाते है। मतलब अपनी आमदनी का अधिकतम हिस्सा उनकी पढ़ाई में खर्च कर देते हैं।
मौजूदा हालात देखें तो सब तरफ लॉकडाउन है, आमदनी हो नही रही है। किसी को वेतन मिल भी रहा है तो उतना ही जिससे बस घर का राशन पानी चल सके। अब मसला यह कि क्या जरूरी है कि जो बच्चें अभी पहली दूसरी में है। जिन्हें शायद अभी तक अपने कपड़े भी खुद से पहनना नही आता है वो ऑनलाइन क्लासेज अटेंड करें? और क्या दो महीने यदि पढ़ाई नही होती तो उनका भविष्य बिगड़ जाएगा?
एक ऐसी नींव जिसने इस भारत को मजबूत बनाया, आज हमारे जिन डॉक्टर्स, साइंटिस्ट, इंजीनियर पर पूरी दुनिया गर्व कर रही है। वो किताबों के आगोश में पले बढ़े है। उन्होंने दोस्तों के साथ मिलके एक रजिस्टर ओर पेन पर सवाल हल करके उस मुकाम को छुआ है। जिससे मनुष्य जीवन के साथ की कीमत पता चलती थी। ये ऑनलाइन शिक्षा उसे चकनाचूर कर देगी और फिर भी समय की यही मांग है तो इसके लिए एक निश्चित दायरा तय करिय कि, दसवीं कक्षा के ऊपर वाले ही इसमें भाग लें। लोग कह रहे है देश 20 साल पीछे चला गया है तो बच्चा एक साल पीछे चला जाये तो कैसी विडम्बना है?
और खुद को इतने कमजोर क्यों साबित करना कि बच्चे पीछे चले जायेंगे। फिर क्यों ऐसी व्यवस्था को लेकर आना जो केवल वर्तमान को ठीकठाक करे और भविष्य को अपाहिज बना दे। हो सकता है मेरी बात से कई लोग सहमत नही होंगे, किन्तु बच्चों को इस ऑनलाइन शिक्षा के दलदल में ना धकेलों दोस्तों।