घरेलू व्यापार इस सदी के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और खुदरा कारोबारियों पर चौतरफा मार पड़ी है। उनके समक्ष भारी वित्तीय संकट के बीच चौतरफा देनदारियों का दबाव है। अगर वक्त रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो देश भर में लगभग 20 प्रतिशत दुकानों को बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
नई दिल्ली। कोरोना महामारी ने देश के सभी सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का कहना है कि अकेले अप्रैल में लगभग पांच लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है जबकि पिछले 100 दिनों में देशभर के खुदरा कारोबारियों को लगभग 15.5 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। कारोबारियों को गंभीर वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है और उनके सामने ग्राहकों के साथ-साथ कर्मचारियों की कमी की भी समस्या है। वित्तीय संकट की इस घड़ी में उन्हें कई वित्तीय दायित्वों को भी पूरा करना है। इससे लॉकडाउन खुलने के डेढ़ महीने से अधिक वक्त गुजर जाने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं हो पाई है।
कैट के महासचिव प्रवीन खंडेलवाल ने कहा कि घरेलू व्यापार इस सदी के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है और खुदरा कारोबारियों पर चौतरफा मार पड़ी है। उनके समक्ष भारी वित्तीय संकट के बीच चौतरफा देनदारियों का दबाव है। अगर वक्त रहते उचित कदम नहीं उठाए गए तो देश भर में लगभग 20 प्रतिशत दुकानों को बंद करने पर मजबूर होना पड़ेगा। इससे बड़ी संख्या में बेरोजगारी भी बढ़ सकती है।
खंडेलवाल ने कहा कि अनुमानों के मुताबिक देश के खुदरा कारोबार को अप्रैल में लगभग पांच लाख करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है।
वहीं, मई में लगभग साढ़े चार लाख करोड़ रुपये, जून महीने में लॉकडाउन हटने के बाद लगभग चार लाख करोड़ तथा जुलाई के 15 दिनों में लगभग 2.5 लाख करोड़ का घाटा हुआ है। कोरोना को लेकर लोगों के दिलों में बड़ा डर बैठा हुआ है जिसके कारण बाजार में खरीदार ही नहीं दिख रहे हैं। पड़ोसी राज्यों या शहरों से सामान खरीदते रहे ग्राहक भी कोरोना के डर और ट्रांसपोर्ट के अभाव में खरीदारी नहीं कर रहे हैं।