दिल्ली-एनसीआर में 55 प्रतिशत ऐसे मॉल्स हैं, जिनमें ज्यादातर फ्लोर एरिया खाली हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है इकॉनमिक स्लोडाउन। ऐसे परिस्थितियों में यह सही वक्त है कि कारोबारी सही रेट पर मोल-तोल कर मॉल्स में दुकानें खरीद लें। इस बात का खुलासा एसोचैम (एसोसिएटेड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया) के हालिया सर्वे से हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में लगभग लगभग 1200 मॉल्स हैं। इनमें फ्लोर एरिया खाली होने के सबसे अधिक मामले गाजियाबाद, गुड़गांव व नोएडा में सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार अगर यही स्थिति बनी रही तो अगले 3 साल में मॉल्स में फ्लोर एरिया 70 प्रतिशत तक खाली हो सकते हैं। एसोचैम के सेक्रेटरी जनरल डी. एस. रावत के अनुसार सर्वे के दौरान देश के अलग-अलग शहरों में स्थित मॉल्स संचालकों से बिजनेस के बारे में सवाल किया गया। इस दौरान 82 प्रतिशत मॉल्स संचालकों ने बताया कि उनके मॉल्स में दुकान खोलने पर बिजनेस नहीं हो रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि दुकानें बंद करने तक की नौबत आ गई है। उन्होंने बताया कि बिजनेस न होने की सबसे बड़ी वजह स्लोडाउन है। इसके अलावा भी और कई कारण हैं, जिससे मॉल्स के रिटेलर्स को दुकानें बंद करनी पड़ रही हैं। मॉल्स मॉलिक रिटेलर्स से शॉप का किराया इतना अधिक वसूल रहे हैं कि यहां दुकानें खोलना आसान नहीं रह गया है।