डेटॉल में एक ख़ास एंटीसेप्टिक क्लोरज़ायलिनॉल है। एंटीसेप्टिक जीवित सतहों पर कीटाणुओं को मारने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। इन्हें खाया नहीं जाता , ये सेवन के लिए नहीं होते। इन्हें उन सतहों पर अमूमन लगाया जाता है , जिनसे मुँह का सम्पर्क न्यूनतम हो।
लेखक: डा स्कन्द शुक्ल, लखनऊ/जाने माने डाक्टर
डेटॉल पर लोगों की व्यापक श्रद्धा रहती रही है। भारत में ही नहीं , दुनिया के अनेक देशों में। चोट लगे , डेटॉल लगा दो। धूल-मिट्टी में कीटाणु होते हैं , सबको मारने के लिए डेटॉल-साबुन से नहा लो। डेटॉलीय स्वच्छता से बेहतर अन्य कोई स्वच्छता नहीं ! डेटॉल ही है , जो कीटाणुओं का काल है : जिसके पास डेटॉल नहीं , वह बेहाल है !
मैं अन्ध-डेटॉल-विरोधी नहीं हूँ। लेकिन डेटॉल या किसी अन्य एंटीसेप्टिक को स्वच्छता की मास्टर-की भी नहीं समझता। एंटीसेप्टिक दुष्प्रयोग के लिए नहीं होते। एंटीसेप्टिक का अत्यधिक प्रयोग उसका सबसे सामान्य दुष्प्रयोग होता है। ऐसे में ऐसा लगना कि डेटॉल हर कीटाणु को मार गिराएगा और हर संक्रमण को हर स्थान से रोकने के लिए हम डेटॉल लगा लेंगे , पूरी तरह से असन्तुलित धारणा है। डेटॉल का सबसे बेहतर पारम्परिक प्रभाव ग्राम-पॉज़िटिव जीवाणुओं पर अधिक पाया गया है। ( अन्य जीवाणुओं व विषाणुओं के सन्दर्भ में इसकी उपयोगिता कम है। ) यही कारण है कि त्वचा के चोटों-घावों इत्यादि पर इसका इस्तेमाल होता रहा है : यहाँ होने वाले संक्रमण ज़्यादातर ग्राम-पॉज़िटिव जीवाणुओं से ही होते हैं।
डेटॉल में एक ख़ास एंटीसेप्टिक क्लोरज़ायलिनॉल है। एंटीसेप्टिक जीवित सतहों पर कीटाणुओं को मारने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। इन्हें खाया नहीं जाता , ये सेवन के लिए नहीं होते। इन्हें उन सतहों पर अमूमन लगाया जाता है , जिनसे मुँह का सम्पर्क न्यूनतम हो। ( कुछ एंटीसेप्टिक हालांकि मुँह और गले के लिए भी इस्तेमाल होते हैं , पर यहाँ भी पेट में ये कम-से-कम पहुँचें , इस पर ज़ोर रहता है। ) एंटीसेप्टिक एंटीबायटिक नहीं होते , ये डिसइन्फेक्टेंट भी नहीं होते। जहाँ एंटीसेप्टिक सतहों पर प्रयोग में लाये जाते हैं , वहाँ एंटीबायटिक शरीर के भीतर जीवाणुओं को मारने के लिए पहुँचाये जा सकते हैं। डिसइन्फेक्टेंट का काम निर्जीव सतहों पर पोछे या सफ़ाई के लिए होता है। तीनों एंटीसेप्टिक-एंटीबायटिक-डिसइन्फेक्टेंट जीवाणुओं को मार भी सकते हैं और उनकी वृद्धि को बिना मारे रोक भी सकते हैं।
डेटॉल अथवा किसी भी एंटीसेप्टिक या सैनिटाइज़र पर निर्भर व्यक्ति हाथ धोने के तरीक़े पर अमूमन ध्यान नहीं देता। वह जल्दी में रहता है और सोचता है कि उसकी जल्दबाज़ी की भरपाई वह रसायन कर देगा , जिससे वह हाथ धो रहा है। यही सोच स्वच्छता के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट साबित होती है। स्वच्छता रसायन से अधिक विधि-युक्ति-ढंग में है : सैनिटाइज़र , एंटीसेप्टिक , डिसइन्फेक्टेंट ग़लत या अधूरे प्रयोग के समय लोगों की ढंग से रक्षा नहीं कर सकेंगे।
आज-कल कोविड 19 के समय अतिसावधान किन्तु अज्ञानमय लोग डेटॉल व अन्य एन्टीसेप्टिकों से भोजन धो रहे हैं। ज्ञात रहे कि पूर्व में भी इन रसायनों से सेवन से लोग बीमार पड़े हैं और कई बार गम्भीर स्थितियाँ भी पैदा हो गयी हैं। कोविड-19 से संघर्ष में अपने-आप को रसायनों के अविवेकी प्रयोग से बचाये रखिए। जानिए कि डेटॉल कहाँ इस्तेमाल होता है और ब्लीच कहाँ। शत्रु से युद्ध करते समय अपने हाथ-पैर सुरक्षित रखे जाते हैं , उन्हें नष्ट नहीं किया जाता।
— स्कन्द।