काउंसिलिंग में बिहार, झारखंड, यूपी, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली से बड़ी संख्या में छात्र व अभिभावक थे, ऐसे लोगों की संख्या अधिक थी जिन्हें एमसीसी के दूसरे राउंड की काउंसलिंग बाद भविष्य अंधकारमय लगा था
नई दिल्ली: अगर आप मेडिकल के क्षेत्र में अपना करियर बनाने को उत्सुक हैं और NEET में अच्छी रैंकिग के बावजूद अखिल भारतीय स्तर पर दूसरे दौर में सीट पाने से वंचित रह गए हैं, तो आपको निऱाश होने की जरुरत नहीं है। आपकी तरह और कई ऐसे छात्र हैं जो मेडिकल कॉउंसिलिंग कमिटी के ऑल इंडिया सीट की दूसरे दौर में पिछड़ गए हैं । ऐसे सभी छात्रों में भविष्य को लेकर बैचेनी स्वाभाविक है । लिहाजा बड़ी संख्या में छात्र अब विदेशों में अपना करियर बनाने का रास्ता तलाश रहे हैं ।
ऐसे छात्रों को मार्गनिर्देशन प्रदान करने के लिए रविवार को दिल्ली के होटल ललित में एक काउंसिलिंग कैंप का आयोजन किया गया ।इसमें विदेशों के कई विश्विद्यालों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। छात्रों की किसी भी शंका के समाधान के लिए इनमें कई विश्विद्यालयों के वाइस चांसलर भी उपस्थित थे। इनमें विक्टोरिया यूनिवर्सिटी ऑफ बारबोडस, लिंकन अमेरिकन यूनिवर्सिटी और ब्रिजटाउन इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के वाईस चांसलर मुख्य थे। ये सभी विश्विद्याल MCI यानी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के पैनल में पहले से हीं है ।
MBBS एडमिशन के लिए उम्मीदवारों में उत्साह : इस काउंसिलिंग सेशनमें बिहार, झारखंड, यूपी, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली से बड़ी संख्या में छात्र औऔर उनके अभिभावक जुटे थे। इनमें ऐसे उम्मीदवारों की संख्या अधिक थी जिन्हें एमसीसी के दूसरे राउंड की काउंसलिंग के बाद अपना भविष्य अंधकारमय लगने लगा था। इन छात्रों ने विदेशी यूनिवर्सिटी की काउंसिलिंग प्रक्रिया को बड़ी गंभीरता से समझने की कोशिश की और विदेश में मेडिकल की पढई से जुड़े अपने कई शंकाओ को भी दूर करने की कोशिश की।
ज्यादातर छात्र और अभिभावक इस सवाल से जूझते दिखे कि NEET की परीक्षा में कुल 13 लाख छात्र बैठे और इसमे से 7 लाख छात्रों ने परीक्षा क्वालीफाई भी किया । लेकिन देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की कुल संख्या 60 हजार है। ऐसे में बाकी बच्चों का भविष्य क्या होगा?
छात्रों को बताया गया कि ऐसे छात्रों के लिए विदेशी विश्विद्यालयों के दरवाजे खुले हुए हैं । छात्रों को बस इस बात का ध्यान रखना होगा कि मेडिकल की पढ़ाई उसी विदेशी कॉलेज में करे जो भारत के MCI के पैनल में हो । MCI ऐसे विदेशी विश्विद्यालों की मेडिकल डिग्री को भारत में मान्यता देता है । दिलचस्प बात ये कि अगर आप ये सोच रहे होंगे कि विदेश में मेडिकल की पढाई महंगा सौदा होगा, तो आप गलत सोच रहे हैं । यहां आप भारतीय विश्विद्यालयों के मुकाबले बहुत कम खर्चे पर डॉक्टर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं । विेदेशी यूनिवर्सिटी के काउंसिलरो ने दावा किया कि उनका फी स्ट्रक्चर भारत के मुकाबले बहुत कम है । पढ़ाई की फीस के साथ रहने और खाने पर पांच साल का खर्च महज 15-20 लाख रुपये है ।
अगर आप भी विदेश में मेडिकल पढ़ाई के लिए मन बना रहे तो बस ये दस्तावेज तैयार कर लें:
1.CBSE से जारी NEET परीक्षा का प्रवेश पत्र
- CBSE रिजल्टt/ रैंक
3.जन्म तिथि प्रमाण पत्र
- दसवीं और बारहवीं पास का सर्टिफिकेट
- 10+2का मार्क शीट
- आठपासपोर्ट साइज फोटो
- आईडी प्रूफ (पैन कार्ड, आधार कार्ड)