अडानी समूह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपनी नजदीकी के चलते कई जांच को प्रभावित करने का काम कर चुके हैं। रमेश के मुताबिक पिछले दो तीन साल में जब कहीं अडानी कंपनी के बारे में जांच शुरू हुई तो केन्द्र सरकार ने जल्द से जल्द उस जांच को बंद करा दिया है: कांग्रेस
कांग्रेस ने राफेल डील की तरह गुजरात स्टेट पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (जीएसपीसी) में भी घोटाले का आरोप सरकार पर लगाया है। सोमवार को कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए पार्टी सांसद जयराम रमेश ने कहा कि नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने जीएसपीसी को मॉडल की तरह पेश किया था। लेकिन, जीएसपीसी दिवालिया हो चुका है। उन्होंने कहा कि जीएसपीसी को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट में रिजर्व बैंक के खिलाफ हलफनामा दिया है।
पूर्व केन्द्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने दावा किया है कि डिपार्टमेंट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस ने कोयला आयात के मामले में 29 हजार करोड़ रुपये का घोटाला खोज निकाला है। जहां दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका इस घोटाले की एसआईटी जांच की मांग कर रही है, वहीं जयराम रमेश ने दावा किया है कि अडानी समूह के खिलाफ सभी सबूत स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सिंगापुर ब्रांच में मौजूद है।
जयराम रमेश ने दावा किया कि केन्द्रीय सचिव हंसमुख अधिया ने एसबीआई की पूर्व चेयरमैन अरुंधति भट्टाचार्य को एक खत लिखते हुए सिगापुर ब्रांच से इस सबूत को मंगाने की बात कही थी। 20 मई 2016 को लिखे गए इस पत्र के जवाब में चार दिन बाद सिंगापुर से एसबीआई ब्रांच का जवाब दिया गया कि सिंगापुर के कानून के मुताबिक यह दस्तावेज किसी को नहीं दिए जा सकते हैं।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अडानी समूह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से अपनी नजदीकी के चलते कई जांच को प्रभावित करने का काम कर चुके हैं। रमेश के मुताबिक पिछले दो तीन साल में जब कहीं अडानी कंपनी के बारे में जांच शुरू हुई तो केन्द्र सरकार ने जल्द से जल्द उस जांच को बंद करा दिया है। रमेश ने दावा किया कि पावर उपकरण के आयात का पहला मामला डीआरआई की एक नोटिस से सामने आया. इस मामले में डीआरआई ने लगभग 6,600 करोड़ के घोटाला की बात कही थी। 2014 में डीआरआई ने कहा कि जिस मूल्य पर पावर उपकरण का आयात होना चाहिए था उससे 6,600 करोड़ रुपये अधिक दिया गया. लेकिन यह मामला बंद कर दिया गया।
रमेश ने कहा कि जीएसपीसी ने पिछले महीने एसबीआई को 15 पन्नों का एक दस्तावेज सौंपा था। इसमें जीएसपीसी ने माना है कि वह पैसा लौटाने की स्थिति में नहीं है। उसने कर्ज माफ करने या गुजरात सरकार की विभिन्न कंपनियों में बांटकर कर्ज के पुर्नगठन का प्रस्ताव दिया है।